विद्यालय विकास हेतु ग्राम विकास समिति की बैठक


विद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य की नींव होता है। इसी सोच के तहत राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, भोपा का बास के विकास के लिए एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामवासियों, विद्यालय स्टाफ, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विद्यालय में आवश्यक भौतिक संसाधनों को जुटाने में सामूहिक सहयोग दिया जाएगा।

इस अवसर पर सरपंच सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। शिक्षा विभाग से श्री राजेश लवानिया, एवं सहगल फाउंडेशन से महादेव शर्मा, जोगिंदर और बाबूलाल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सहयोग का आश्वासन दिया। राजेश लवानिया और महादेव शर्मा ने सहगल फाउंडेशन की कार्य प्रणाली के बारे में बताया और विद्यालय में प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी ।  

बैठक में यह बताया गया कि विद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल संस्थान के रूप में विकसित करने हेतु एक समग्र योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत विद्यालय में डिजिटल और भौतिक दोनों प्रकार के संसाधनों का विस्तार किया जाएगा। राष्ट्रीय पुरस्कृत शिक्षक मोहम्मद इमरान ख़ान ने बताया कि यह योजना सामूहिक सहभागिता पर आधारित है, जिसका उद्देश्य सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय स्टाफ इस दिशा में पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहा है।

विद्यालय में हाल ही में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जिसमें कंप्यूटरों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों की डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इस नवाचार को ग्रामवासियों द्वारा अत्यधिक सराहा गया है। इससे न केवल बच्चों की सीखने की गति तेज हुई है, बल्कि तकनीकी शिक्षा की ओर उनकी रुचि भी बढ़ी है।

निष्कर्षतः, यह पूरा प्रयास विद्यालय, ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के सामूहिक सहयोग का परिणाम है। राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, भोपा का बास आज शिक्षा की दिशा में एक प्रेरणास्रोत बन रहा है, जो यह दर्शाता है कि सामूहिक संकल्प और सहभागिता से किसी भी संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

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