फुलब्राइट कार्यक्रम के अंतर्गत अमेरिकी शिक्षिकाओं का अलवर के संस्कृत विद्यालय में शैक्षणिक दौरा
यह दौरा 11 जुलाई से 17 जुलाई 2025 के मध्य आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना है। इस दौरान अमेरिकी शिक्षिकाएं न केवल भारतीय विद्यालय प्रणाली से परिचित होंगी, बल्कि यहाँ की संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक व्यवस्थाओं और ग्रामीण परिवेश को भी अनुभव करेंगी।
ग्लोबल क्लासरूम प्रोग्राम में आने वाली अमेरिकी शिक्षिकाएं:
1. लिन्सी सिमंस
लिंडसे पिछले 12 वर्षों से सैरालैंड सिटी स्कूल्स, अलबामा में ESL टीचर के रूप में कार्यरत हैं। वे K-12 कक्षा तक के बहुभाषी विद्यार्थियों के साथ कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के सामाजिक, भाषाई और शैक्षणिक विकास के लिए अनेक नवाचार किए हैं। वे नेशनल बोर्ड सर्टिफाइड टीचर हैं और टीसोल में मास्टर्स डिग्री प्राप्त हैं। वे 2024 की विडा फेलो भी हैं।
2. टेरेज़ा बॉटमैन
टेरेज़ा फ्रैंकलिन हाई स्कूल, पोर्टलैंड, ओरेगन में अंग्रेज़ी भाषा विकास विशेषज्ञ हैं। उन्होंने पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ एजुकेशन की डिग्री प्राप्त की है। वे स्वयं एक पूर्व अंग्रेज़ी शिक्षार्थी रही हैं और बहुभाषी छात्रों के लिए शिक्षण रणनीतियों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने ओरेगन राज्य की Multilingual Learner Strategic Plan के निर्माण में भी योगदान दिया है।
स्थानीय समन्वयक की भूमिका:
इस कार्यक्रम की स्थानीय समन्वयक की भूमिका निभा रहे हैं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद इमरान खान मेवाती, जो एक फुलब्राइट DAI शिक्षक हैं। वे शिक्षा में नवाचार और डिजिटल तकनीक के उपयोग के लिए भारत और विदेशों में प्रसिद्ध हैं। वे वर्ष 2023 में फ़ुलब्राइट स्कालरशिप के माध्यम से एक सेमस्टर तक अमेरिका का यूनिवर्सिटी ऑफ़ रोचेस्टर में रहे और अपना रिसर्च प्रोजेक्ट किया है। उनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय सहभागिता साकार हो पाई है।
प्रशासनिक सहयोग:
अलवर जिले की जिला कलेक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला और संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा इस कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। यूनाइटेड स्टेट इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन (USIEF) ने उन्हें पत्र लिखकर उनके मार्गदर्शन और समर्थन के लिए आभार प्रकट किया है।
इस कार्यक्रम के लाभ:
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अमेरिकी शिक्षकों को भारत की शिक्षा प्रणाली, भाषा एवं संस्कृति को समझने का अवसर मिलेगा।
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स्थानीय शिक्षक और छात्र अमेरिकी शिक्षा प्रणाली और वैश्विक शैक्षिक दृष्टिकोण से परिचित होंगे।
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यह दौरा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक शैक्षिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
यह पहल वैश्विक शिक्षा की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है जो दोनों देशों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को सीखने और साझा करने का सशक्त मंच प्रदान करती है।

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