Teachers for Global Classrooms (TGC) कार्यक्रम
अंतर्राष्ट्रीय संगठन IREX एवं यूनाइटेड स्टेट इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन (USIEF) के सहयोग से "Teachers for Global Classrooms (TGC)" कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 11 जुलाई से 17 जुलाई 2025 तक राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय भोपा का बास में अमेरिका की दो शिक्षिकाओं, सुश्री टेरेज़ा बोटमैन एवं सुश्री लिन्सी सिमंस, की मेजबानी की गई।
इस सात दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक शिक्षा, सांस्कृतिक समझ एवं शिक्षण कौशल का आपसी आदान-प्रदान था।
मुख्य गतिविधियाँ और उपलब्धियाँ:
11 जुलाई
पारंपरिक स्वागत
11 जुलाई को शिक्षिकाओं का स्वागत होस्ट शिक्षक मोहम्मद इमरान खान द्वारा अलवर के लेमन ट्री होटल में किया गया और औपचारिक रूप से आगामी 7 दिवस का एजेंडा साझा किया गया। इस अवसर पर शाम के समय मोती डूंगरी स्थित महाराणा प्रताप पार्क और हनुमान मंदिर का भ्रमण भी किया गया।
12 जुलाई
विद्यालय गतिविधियों का अवलोकन
12 जुलाई को विद्यालय में शिक्षिकाओं का स्वागत पुष्प-मालाओं, पारंपरिक नृत्य, गीत और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इस दिन विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था को देखा और विद्यालय स्टाफ के साथ भारतीय और अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था पर विचार विमर्श किया गया । उन्होंने कम संसाधनों के बावजूद विद्यालय विकास हेतु स्टाफ के प्रयासों और स्थानीय शैक्षणिक वातावरण की सराहना की।इस अवसर पर जान सहयोग से बनाई गई आई सी टी लैब और पुस्तकालय का प्रयोग भी देखा गया। उन्होंनें विद्यालय मैगज़ीन को एक अच्छा नवाचार बताया और बच्चों की रचनात्मकता को प्रदर्शित करने के लिए बेहतरीन मंच माना ।
सरिस्का टाइगर रिज़र्व भ्रमण
लंच के पश्चात अमेरिकी शिक्षिकाओं को भारतीय वन्यजीवन, जैव विविधता तथा संरक्षण प्रयासों की जानकारी हेतु बाला क़िला से सफारी कराई गई। इस भ्रमण में अलवर के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों का परिचय भी कराया गया।
13 जुलाई
सांस्कृतिक स्थलों का अवलोकन
रविवार को अलवर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का भ्रमण किया गया । अरावली की सुरम्य पहाड़ियों में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, भानगढ़ किला, भर्तृहरि धाम, मंगलासर बांध आदि स्थानों की यात्रा की गई। इस दौरान इतिहास, धर्म और लोककथाओं पर आधारित संवाद एवं सांस्कृतिक सहभागिता हुई।
14 जुलाई
अंग्रेजी शिक्षकों के लिए कार्यशाला
अतिथि शिक्षक अंग्रेजी भाषा के विशेषज्ञ शिक्षक हैं । इसलिए, अमेरिकी विद्यालयों में प्रयोग ली जा रही अंग्रेजी भाषा शिक्षण की नवीनतम तकनीक सीखने के उद्देश्य से 20 स्थानीय अंग्रेज़ी शिक्षकों के साथ कार्यशाला आयोजित कर अमेरिका की उन्नत शिक्षण विधियाँ साझा की गईं। इस कार्यशाला में स्कूल प्रिंसिपल्स, लेक्चरर्स और शिक्षकों को सम्मिलित किया गया। कार्यशाला में लैंग्वेज फ्रेम्स, “I do, we do, you do”, Bingo जैसे खेल आधारित अधिगम तकनीकों पर चर्चा हुई।
महिला सशक्तिकरण से साक्षात्कार
"We Shakti Trust" की महिला उद्यमियों से मिलकर स्थानीय नवाचार और आत्मनिर्भरता के प्रयासों को जाना गया।
15 जुलाई
विद्यार्थियों के साथ संवाद
अतिथि शिक्षकों द्वारा विद्यालय में शिक्षण कार्य कराया गया जो भाषा शिक्षण पार आधारित था। गतिविधि आधारित शिक्षण से छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास और वैश्विक जुड़ाव की भावना प्रकट हुई। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जिसमें रंगोली, मेंहदी और भारतीय वेशभूषा से संबंधित गतिविधियां थी ।
16 जुलाई
भजेड़ा विद्यालय का दौरा
अलवर के शैक्षिक परिदृश्य को समझने के लिए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भजेडा का भी दौरा किया गया । इस विद्यालय में बालिका सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे वीर बाला नवाचार के बारे में प्रधानाचार्य से चर्चा हुई व बालिकाओं ने परेड का प्रदर्शन किया गया। शाम के समय निर्वाण वन फाउंडेशन के संस्थापक निर्वाण बोधिसत्व से शैक्षिक विचार विमर्श हुआ । ट्रेकिंग के उपरांत डढ़ीकर की पहाड़ियों पर प्राचीन शैलचित्रों का अवलोकन किया गया। अमेरिकी शिक्षकों के सम्मान में मेजबान शिक्षक ने डढ़ीकर फोर्ट में रात्रि भोज का आयोजन किया ।
17 जुलाई
समापन और भविष्य की रूपरेखा
कार्यक्रम का समापन स्नेहिल विदाई के साथ हुआ। विदाई से पूर्व भविष्य में इस साझेदारी को और सशक्त करने की रूपरेखा पर चर्चा हुई।
मुख्य बिंदु:
वैश्विक शिक्षा का अनुभव:
विद्यार्थियों, शिक्षकों और समुदाय को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षकों के साथ जुड़ने का अवसर मिला, जिससे वैश्विक दृष्टिकोण का विकास हुआ।सांस्कृतिक आदान-प्रदान:
भारतीय परंपराओं, लोकनृत्य, रीति-रिवाज़ों और धार्मिक सहिष्णुता को अमेरिका की शिक्षिकाओं ने करीब से देखा और सराहा।शिक्षण विधियों का साझा:
इंटरएक्टिव अंग्रेज़ी शिक्षण की आधुनिक विधाओं को साझा किया गया, जो राजस्थान के शिक्षकों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे ।छात्रों की सहभागिता और आत्मविश्वास:
अमेरिकी शिक्षकों से संवाद कर छात्र-छात्राओं में अभिव्यक्ति, जिज्ञासा और आत्मविश्वास का स्तर बढ़ा।महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा:
"We Shakti Trust" में महिला उद्यमियों से मिलकर अमेरिका की शिक्षिकाओं ने ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को सराहा।स्थानीय धरोहर और इतिहास से जुड़ाव: नीलकंठ महादेव, भानगढ़, सरिस्का जैसे स्थलों का भ्रमण कर अमेरिका की शिक्षिकाएं भारत की ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़ सकीं।
सामुदायिक सहभागिता और मेहमाननवाज़ी:
स्थानीय अभिभावकों, पड़ोसियों और ग्रामीणों ने जिस आत्मीयता से मेहमानों का स्वागत किया, वह भारत की ‘अतिथि देवो भवः’ संस्कृति का उदाहरण बना।भविष्य के सहयोग की संभावना:
यह कार्यक्रम राजस्थान के स्कूलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और सतत् वैश्विक संवाद की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।
यह कार्यक्रम न केवल हमारे विद्यालय के लिए बल्कि संपूर्ण राजस्थान के लिए एक गौरवशाली उपलब्धि रही। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समुदाय को वैश्विक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शिक्षा में नवाचार की प्रेरणा मिली। यह कार्यक्रम यह सिद्ध करता है कि सीमाएं भाषा या भूगोल की नहीं, दृष्टिकोण की होती हैं और शिक्षा उन्हें पार करने का माध्यम है।
भविष्य में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोगात्मक कार्यक्रमों को राज्य भर में बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे "ग्लोबल क्लासरूम" का सपना हकीकत बन सके।










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